लेखक:- vikram raj thakur 01.2

Ruthe Pyar Ko Mananay

Ruthe Pyar Ko Manane Ke Liye Shayari

बिन बात के ही रूठने की आदत है,
किसी अपने की चाहत पाने की चाहत है,
आप खुश रहें, मेरा क्या है,
में तो आईना हूँ मुझे टूटने की आदत है।

रूठने-मनाने का, सिलसिला कुछ यू हुआ।
मान गया था मगर, फिर रूठने का दिल हुआ।।

दिल्लगी तक तो ठीक था लेकिन ये ठीक नहीं
दूर रह कर कहती हैं क्या मैं तुम्हारे पास नहीं

मुद्दतों बाद आज फिर परेशान हुआ है दिल,
जाने किस हाल में होगा मुझसे रूठने वाला….

रूठ जाओ कितना पर मना लेंगे,
दूर जाओ कितना भी बुला लेंगे,
दिल आखिर दिल है कोई सागर की रेत तो नहीं,
जो लिख के नाम आपका मिटा देंगे

तुम खफा हो गए तो कोई ख़ुशी न रहेगी,
तुम्हारे बिना चिरागों में रोशनी न रहेगी,
क्या कहे क्या गुजरेगी इस दिल पर,
जिंदा तो रहेंगे पर ज़िन्दगी न रहेगी।

दिल से तेरी याद को जुदा तो नहीं किया,
रखा जो तुझे याद कुछ बुरा तो नहीं किया,
हम से तू नाराज़ हैं किस लिये बता जरा,
हमने कभी तुझे खफा तो नहीं किया।

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