रूठे प्यार को मनाने की शायरी
हर बार रिश्तों में और भी मिठास आई है,
जब भी बाद रूठने के तू मेरे पास आई है।
बस एक यही आदत तो मेरी खरा़ब है …
रूठने के लिये ना जाने कितने बहाने चाहिये
और मान जाने के लिये …तेरा बोलना ही काफी है …
रूठने की कोई…….दास्ताँ रही होगी. यकीनन कोई …….. खता रही होगी
तुमने सलाम नहीं लिया होगा उनका. यही तो बात दिल को सता रही होगी
बहाने बनाना कोई उनसे सीखे, बनाकर मिटाना कोई उनसे सीखे,
सबब रूठने का भी होता है लेकिन, यूं ही रूठ जाना कोई उनसे सीखे !
रूठने-मनाने का,. सिलसिला कुछ यू हुआ।
मान गया था मगर,. फिर रूठने का दिल हुआ।।
जंग न लग जाये मोहब्बत को कहीं…
रूठने मनाने के सिलसिले जारी रखो..।।
उन्हें रूठने में वक़्त नहीं लगता
मेरे पास वक़्त नहीं मानाने को …
रूठनें का लुत्फ़ आया ही नहीं,
आप पहले ही मनाने आ गए…
हमें तो रूठने का सलीका भी नहीं आता
जाते-जाते खुद को उसके पास ही छोड़ आये ………
गलती एक करी थी उसने जो हमने सच मानी थी…°
हमने जाने को कहा और उसने रुठने की ठानी थी़.
तू जो रूठ्ने लगा है दिल टूटने लगा है
अब सब्र का भी दामन मुझसे छूटने लगा है
तुझे खबर भी है इसकी ओ रूठने वाले,
तुम्हारा प्यार ही मेरा कीमती खजाना था
सारी उम्र करते रहे इंतज़ार तेरे रुठने का
कभी तो मौका दिया होता तूने मनाने का
ज़माने से रुठने की जरूरत ही क्यों हो
जब मेरे अपने ही मेरे बने रकीब हो
जनाब मै उम्मीद रखता हुं की आपको ये पोस्ट पसंद आई होंगी, आपकों ये पोस्ट कैसी लगी मुझे कमेंट में बताना क्योकि ये लिखते लिखते मैने 3 कप चाय भी पिली और अब मेरी आंखे भी जवाब देने लगी है, तो इसको अपने दोस्तों साथ शेयर करना ना भूलना और अपनी यारी निभाना, धन्यवाद दोस्तों

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