लेखक:- vikram raj thakur 01.2

कोई रुठ गया हो तों उसे मनाने की शायरी

माफी की शायरी

धड़कन बनके जो दिल में समा गए हैं,

हर एक पल उनकी याद में बिताते हैं,

आंसू निकल आये जब वो याद आ गए,

जान निकल जाती है जब वो रूठ जाते हैं।

रूठने की कोई दास्ताँ रही होगी
यकीनन कोई खता रही होगी
तुमने सलाम नहीं लिया होगा उनका
यही तो बात दिल को सता रही होगी

रूठे हुए को मना लेंगे हम
बीते हुए दिनों को भुला देंगे हम
चले नई शुरवात करते हैं
दुनिया के कायदे तोड़ कर जिंदगी जीते हैं

तेरे आखो से एक आंसू गिरता हैं
तो इस दिल को दर्द होता हैं
कही तुझे दर्द न हो
तेरे दर्द की दुआ भी ये दिल मांग लेता हैं

नाराज़गी नहीं है कोई मै किससे शिकायत करूँ! . . . .
ये रूठने मनाने की रस्म तो अपनों में हुआ करती है!!

बस एक यही आदत तो मेरी खरा़ब है …
रूठने के लिये ना जाने कितने बहाने चाहिये
और मान जाने के लिये …तेरा बोलना ही काफी है …

गुलाब से भी कोमल तेरा ये जिस्म
ये झील के तरह नी ले आँखें,
ख़ूबसूरती की मूरत हैं तू
फिर क्यों दुनिया से डरती हैं तू

इम्तिहान किस चीज़ का ले रहे हो तुम हमसे
कितना दर्द दिया तुमने मुझे खामोशी से
एक बार बात करो हमसे
बहुत कुछ कहना बाकी हैं तुमसे